पुणे के लक्ष्मीनगर में महिला आरोग्य समितियों के जरिये सामुदायिक गतिविधियों का सुदृढ़ीकरण

किसी उपेक्षित शहरी बस्ती में महिला आरोग्य समिति का गठन एक महत्त्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार आता है, बल्कि बस्ती की महिलाओं के आत्मविश्वास और उनकी सामूहिक ताकत में भी बढ़ोत्तरी होती है।

पुणे के लक्ष्मीनगर में महिला आरोग्य समितियों के जरिये सामुदायिक गतिविधियों का सुदृढ़ीकरण

जब कोई समुदाय अपने स्वास्थ्य संबंधी मामलों की जिम्मेदारी खुद उठाने लगता है, तो इससे सार्थक और स्थायी सुधार संभव हो जाता है। लक्ष्मीनगर इसका एक अच्छा उदाहरण है। पुणे की इस गरीब बस्ती में एक एनजीओ के सहयोग से महिला आरोग्य समिति का गठन हुआ। महिला आरोग्य समिति के गठन से यहाँ के निवासियों को स्वास्थ्य सेवाओं और दूसरी जरूरी नागरिक सेवाओं में मौजूद कमियों को सामूहिक तौर पर दूर करने में मदद मिली।

लक्ष्मीनगर पुणे के कोथरुड वार्ड में पहाड़ी इलाके पर 1995 से 2000 के बीच विकसित हुआ। इस बस्ती में लगभग 750 घर हैं, जिनमें करीब 2,500 लोग रहते हैं। इनमें से कई असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं, जैसे निर्माण कामों में काम करने वाले मजदूर, कबाड़ बीनने वाले, ड्राइवर और घरेलू कामगार आदि। कई परिवार यहाँ महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त जिलों तथा तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों से आकर बसे हैं। यहाँ अधिकांश मकान आधे पक्के हैं। इन परिवारों की औसत मासिक आय ₹13,500 से ₹22,000 के बीच है।

कोविड-19 महामारी के दौरान पुणे नगर निगम ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने के लिए लक्ष्मीनगर में एक ई-हेल्थ सेंटर स्थापित किया। टिन के ढाँचे में शुरू हुए इस अस्थायी हेल्थ सेंटर को आगे चलकर डॉक्टर, नर्स, दवाखाने और सहायक कर्मचारियों की सुविधाओं से युक्त एक स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र बना दिया गया। इसके अपने महत्त्व के बावजूद इसे समय के साथ संचालन सम्बन्धी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

अनुसंधान ट्रस्ट-साथी मुख्यतः ग्रामीण और जनजातीय इलाकों के लिए 1998 से स्वास्थ्य क्षेत्र में काम कर रहा है। महामारी के दौरान शहरों में जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सहायता की बढ़ती जरूरतों को समझने के बाद इस ट्रस्ट ने शहरी समुदायों में भी अपना काम शुरू कर दिया।

लक्ष्मीनगर में सामुदायिक बैठकों के आयोजन से साथी (ट्रस्ट) ने अपने शहरी काम की शुरुआत की। इन बैठकों में ज्यादातर वहां की महिलाओं ने भाग लिया। बैठकों में स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं, उपचार व्यवस्था की कमियों और समुदाय की प्राथमिकताओं पर बात हुई। भागीदारों ने कर्मचारियों की अनियमितता, दवाओं की उपलब्धता से जुड़ी समस्याओं और स्वास्थ्य केंद्र के खराब संचालन पर चिंता जाहिर की।

इन समस्याओं को सामूहिक रूप से हल करने के लिए महिलाओं ने साथी (ट्रस्ट) के साथ मिलकर एक महिला आरोग्य समिति बनाने का निर्णय लिया।

A group of women sitting in a circle on the floor in a room, engaging in discussion, with a child playing in the center.

महिला आरोग्य समितियाँ शहरी क्षेत्रों की झुग्गियों में रहने वाली 10-12 स्थानीय महिलाओं का एक सामुदायिक समूह है, जिसका नेतृत्व महिलाएं करती हैं। स्थानीय निवासियों और स्वास्थ्य सेवाओं के बीच की खाई को पाटने के लिए राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन (NUHM) के तहत इन समितियों को बनाया जाता है। ये समितियां स्वच्छता, पोषण, साफ-सफाई और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता को बढ़ावा देती हैं, साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के काम में आशा कार्यकर्ताओं की मदद करती हैं। आशा कार्यकर्त्ता इस समिति की सदस्य सचिव होती हैं और किसी एक सदस्य को अध्यक्ष चुना जाता है।

महिला आरोग्य समिति से अपेक्षा की जाती है कि वह बस्ती में स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता पैदा करेगी। साथ ही समुदाय के सदस्यों को समय पर उपयुक्त सेवा प्रदाताओं के पास भेजकर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देगी। भली-भांति काम करने वाली महिला आरोग्य समिति महिलाओं को सशक्त बनाकर समुदाय को अपने स्वास्थ्य और उससे जुड़े दूसरे मुद्दों की जिम्मेदारी लेने में सक्षम बना सकती है। इस तरह यह लोगों की जरूरतों और स्वास्थ्य सेवा की उपलब्धता के बीच की खाई को पाटती है।

इस प्रक्रिया की शुरुआत छोटी समूह चर्चाओं से हुई, जिसने धीरे-धीरे विकसित होते हुए 2024 में औपचारिक तौर पर काम करने वाली महिला आरोग्य समिति का रूप ले लिया। साथी (ट्रस्ट) ने इस समिति के सदस्यों को सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छता के तरीकों, सरकारी विभागों के साथ संवाद और स्थानीय अधिकारियों को दिए जाने वाले औपचारिक आवेदन तैयार करने सम्बन्धी प्रशिक्षण दिए। इस ज्ञान से लैस होकर समिति ने बस्ती की समस्याओं पर व्यवस्थित ढंग से ध्यान देना शुरू किया।

सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति में सुधार करना इस महिला आरोग्य समिति की सबसे शुरुआती सफलताओं में से एक थी। ये शौचालय पहले काफी गन्दे रहते थे और उनमें दरवाजे या ऐसी ही दूसरी बुनियादी सुविधाओं की कमी थी। वार्ड अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क के जरिये इन समस्याओं को ठीक किया गया और शौचालयों को लोगों के इस्तेमाल के लिए खोला गया।

इन सामूहिक प्रयासों के परिणामस्वरूप स्वास्थ्य केंद्र में एक सप्ताह के भीतर एक डॉक्टर की नियुक्ति हुई और भले ही कर्मचारी बदलते रहे लेकिन डॉक्टर का पद लगातार भरा रहा।

इसके बाद स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र पर ध्यान दिया गया। डॉक्टर की अनियमितता और केंद्र के असुविधाजनक समय (जो बस्ती वालों के काम के समय से टकराता था) के कारण लोग निजी स्वास्थ्य केंद्रों में इलाज कराने लगे थे। महिला आरोग्य समिति ने वार्ड मेडिकल ऑफिसर डॉ. अंजलि तिलेकर के साथ एक बैठक आयोजित की। इस बैठक में महिलाओं ने स्वास्थ्य केंद्र के देरी से खुलने, स्टाफ की अनुपस्थिति, दवाओं की कमी के साथ-साथ रोगी की गोपनीयता के अभाव के बारे में खुलकर अपनी चिंताएँ सामने रखीं।

A group of women and a few men seated on the ground in a community meeting outside an eHealth center. The women are dressed in colorful traditional attire. A large banner is visible behind them, and some participants are taking notes.

इस बैठक में समुदाय ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। लेकिन इसके साथ ही कुछ स्थानीय राजनीतिक समूहों के विरोध का सामना भी करना पड़ा। इन राजनीतिक समूहों ने साथी के कर्मचारियों और महिला आरोग्य समिति के सदस्यों पर शिकायत न करने का दबाव बनाया। इसके जवाब में साथी ने औपचारिक प्रशासनिक चैनलों के जरिये स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ संवाद जारी रखा। वार्ड मेडिकल ऑफिसर ने इन चिंताओं को सही पाया और उन्हें दूर करने के लिए मदद की।

आज लक्ष्मीनगर का स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र नियमित रूप से काम कर रहा है। यह स्वास्थ्य केंद्र प्रतिदिन 20 से 30 रोगियों को स्वास्थ्य सेवा प्रदान कर रहा है। पिछले दो वर्षों में 31 गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं ने इस स्वास्थ्य केंद्र की सेवाओं का लाभ उठाया है और यहाँ 63 बच्चों का पूर्ण टीकाकरण किया गया है।

इन सामूहिक प्रयासों के परिणामस्वरूप स्वास्थ्य केंद्र में एक सप्ताह के भीतर एक डॉक्टर की नियुक्ति हुई और भले ही कर्मचारी बदलते रहे लेकिन डॉक्टर का पद लगातार भरा रहा। एक दूसरे अवसर पर जब एक डॉक्टर बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी के चलते केन्द्र पर नियमित रूप से देरी से आ रही थीं, तो महिला आरोग्य केंद्र के सदस्यों ने इस स्थिति से निपटने के लिए टकराव का नहीं बल्कि सहानुभूति का रास्ता अपनाया। एक मासिक बैठक के दौरान उन्होंने इस समस्या के संभावित समाधानों पर चर्चा की और बच्चे की देखभाल के लिए स्थानीय स्तर पर सहायता करने की पेशकश की। इस सहयोगी दृष्टिकोण ने स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने वालों कर्मचारियों और समुदाय के बीच भरोसे को बढ़ाया और इससे स्वास्थ्य केंद्र की उपस्थिति में सुधार भी हुआ है।

महिला आरोग्य समिति ने बस्ती के लिए दो आशा कार्यकर्ताओं की नियुक्ति कराने में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई और स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र के लिए एक स्थायी भवन की मांग के लिए एक हस्ताक्षर अभियान भी शुरू किया। स्थानीय लोगों ने नगर निगम अधिकारियों को एक ज्ञापन सौंपा और इस दिशा में प्रयास अब भी जारी है।

A group of five individuals, including women in traditional attire, stand in an office setting with a desk, chair, and several framed portraits on the wall. One woman is handing a document to another while two others look on.

सबसे बड़ी बात यह है कि इन प्रयासों से बस्ती की महिलाओं के आत्मविश्वास और सामूहिक ताकत में बढ़ोत्तरी हुई।

आज लक्ष्मीनगर का स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र नियमित रूप से काम कर रहा है। यह स्वास्थ्य केंद्र प्रतिदिन 20 से 30 रोगियों को स्वास्थ्य सेवा प्रदान कर रहा है। पिछले दो वर्षों में 31 गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं ने इस स्वास्थ्य केंद्र की सेवाओं का लाभ उठाया है और यहाँ 63 बच्चों का पूर्ण टीकाकरण किया गया है। असंक्रामक रोगों के लिए नियमित तौर पर जांच शिविर लगाए जाते हैं जिसके तहत फिलहाल कई लोग मधुमेह और उच्च रक्तचाप का इलाज करवा रहे हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं के अलावा महिला आरोग्य समिति ने स्थानीय सरकारी अधिकारियों के साथ लगातार संवाद के जरिये पानी के पाइपलाइन, सड़कों की लाइटों और जल निकासी प्रणालियों में सुधार कराने में भी सफलता पाई।

सबसे बड़ी बात यह है कि इन प्रयासों से बस्ती की महिलाओं के आत्मविश्वास और सामूहिक ताकत में बढ़ोत्तरी हुई। लक्ष्मीनगर का अनुभव यह दिखाता है कि संगठित सामुदायिक भागीदारी और जिम्मेदार सार्वजनिक प्रणालियों की सहायता स्वास्थ्य और जीवन स्थितियों में व्यावहारिक और स्थायी सुधार ला सकती है।