भारत में 104 करोड़ से अधिक लोग – आबादी का करीब 8.6 फीसद – ट्राइबल समुदायों का हिस्सा हैं। इसमें से कई समुदाय दूर-दराज के इलाकों में रहते हैं, जहाँ स्वास्थ्य सेवाओं की बहुत कमी है और इन समुदायों को राष्ट्रीय औसत की तुलना में बीमारियों का ज्यादा बोझ उठाना पड़ता है।
मलेरिया और सिकल सेल डिजीज जैसी बीमारियों के प्रति ऐतिहासिक तौर पर संवेदनशील रहे इन समुदायों में अब टीबी के साथ-साथ वो बीमारियाँ भी बड़ी तेजी से बढ़ रही हैं जो संक्रामक नहीं हैं।
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यह संक्षिप्त वीडियो इन स्वास्थ्य सम्बन्धी असमानताओं के मूल कारणों की पड़ताल करता है और इन समुदायों तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने और इनके स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए सरकार और जन-हितैषी गैर-लाभकारी संगठनों द्वारा की जा रही मुख्य कोशिशों की जानकारी देता है।
