भारत में पैलिएटिव केयर को नई दिशा देने वाले डॉ. राजगोपाल

चार दशकों तक मरीजों की शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक तकलीफों को कम करने की एक डॉक्टर की कड़ी मेहनत ने भारत में पैलिएटिव केयर को एक नई दिशा दी।

चार दशकों तक मरीजों की शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक तकलीफों को कम करने की एक डॉक्टर की कड़ी मेहनत ने भारत में पैलिएटिव केयर को एक नई दिशा दी।

मौत की कगार पर खड़े एक पड़ोसी की दर्द भरी चीखों और मेडिकल स्टूडेंट के तौर पर अपनी बेबसी ने डॉ. राजगोपाल पर गहरा असर डाला।

यह ऐसा अनुभव था जिसने उन्हें दर्द दूर करने के विभिन्न तरीकों के साथ प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया।

इन छोटी-छोटी कोशिशों के चलते 1993 में कालीकट पेन एंड पैलिएटिव केयर सोसाइटी की स्थापना हुई।

केरल के सात राज्यों में शुरू हुए इस छोटे से प्रोजेक्ट ने 1995 तक विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक मॉडल प्रोजेक्ट का रूप ले लिया। इसमें सैकड़ों समुदाय आधारित केंद्र थे, जो वालंटियर्स की मदद से चलते थे।

पैलिएटिव केयर को देश भर में फ़ैलाने के लिए आगे चलकर उन्होंने पैलियम इंडिया की स्थापना की। 2006 में उन्होंने त्रिवेन्द्रम इंस्टीट्यूट ऑफ़ पैलिएटिव साइंसेज की स्थापना की। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन का सहयोगी केंद्र बन गया और इसने राष्ट्रीय नीतियों को प्रभावित किया।

पैलियम देश भर में आज पैलिएटिव केयर के 226 केन्द्रों को खोलने में मददगार रहा है। 13000 से अधिक स्वास्थ्य कर्मचारियों को पैलिएटिव केयर की ट्रेनिंग देने में इसने सहायता की है और पैलिएटिव केयर की सेवाओं को 1,27,000 से अधिक जरूरतमंदों तक पहुँचाने में मदद की है।

डॉ. राजगोपाल और पैलियम की टीम नीतियों को प्रभावित करने में भी मददगार रही है, ताकि असहनीय दर्द झेल रहे लोगों को उचित दवाइयां और मदद आसानी से सुलभ हो।

हमें डॉ. राजगोपाल के साथ कुछ वक्त बिताने का मौका मिला। इस मुलाकात ने हमें उनके समृद्ध अनुभवों – कुछ दुखद और कुछ प्रेरक – को जानने और पैलिएटिव केयर की दुनिया को समझने का अवसर दिया।