भारत में प्रति वर्ष लगभग पांच लाख लोगों को अंग प्रत्यारोपण की जरूरत पड़ती है। लेकिन बीस हजार से भी कम लोगों का अंग प्रत्यारोपण हो पाता है। यानी आवश्यकता और उसकी पूर्ति के बीच बहुत बड़ा अंतर है। हर साल हज़ारों लोग अंगों की अनुपलब्धता के कारण इंतज़ार करते-करते मर जाते हैं।
भारत में मृतक व्यक्तियों द्वारा अंगदान की दर प्रति दस लाख में एक से भी कम, यानी लगभग नगण्य है। विश्व में सबसे ज्यादा अंगदान दर वाला देश स्पेन है, वहाँ प्रति दस लाख लोगों में 50 से अधिक लोग अंगदान करते हैं।
मोहन फाउंडेशन एक ऐसी संस्था है, जो इस अंतर को पाटने के लिए अथक प्रयास कर रही है। यह संस्था अंगदान के हर पहलू पर काम कर रही है। इसमें संभावित दाताओं के परिवारों को प्रेरित करने से लेकर, ट्रांसप्लांट सर्जनों को प्रशिक्षित करने और अंगदान संबंधी नीतियों को और बेहतर बनाने की दिशा में काम करना शामिल है।
हम यहाँ डॉ. सुनील श्रॉफ के साथ हुई एक बातचीत का वीडियो साझा कर रहे हैं। डॉ. सुनील श्रॉफ मद्रास मेडिकल मिशन अस्पताल में वरिष्ठ मूत्ररोग विशेषज्ञ (यूरोलॉजिस्ट) और ट्रांसप्लांट सर्जन हैं। वे मोहन फाउंडेशन के संस्थापक एवं मैनेजिंग ट्रस्टी भी हैं।
डॉ. श्रॉफ लगभग तीन दशकों से भारत में मृतक अंगदान कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने न सिर्फ कई उच्च स्तरीय प्रत्यारोपण सर्जरी की हैं, बल्कि जागरूकता बढ़ाने और नीति निर्माण में भी योगदान किया है। उन्होंने अंगदान के बारे में लोगों की सोच को बदलने की दिशा में महत्त्वपूर्ण काम किया है। मोहन फाउंडेशन के जरिए डॉ. श्रॉफ ने मस्तिष्क मृत्यु के मामले में मृतक अंगदान को बढ़ावा देने, अंग प्रत्यारोपण प्रणालियों में सुधार लाने और अस्पतालों, सरकारों और जनता के बीच जागरूकता फैलाने की दिशा में काफी योगदान दिया है।
