नैनीताल और अल्मोड़ा अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाने जाते हैं। यहां की घुमावदार पहाड़ियाँ, घने जंगल और शांत झीलें देश भर के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। लेकिन खड़ी ढलानों और घुमावदार रास्तों पर बसे पहाड़ी गांवों की संघर्ष भरी जिंदगी अक्सर इन सुंदर दृश्यों के पीछे छिप जाती है। लंबी दूरी और भौगोलिक परिस्थितियों की जटिलता इन दूरदराज इलाकों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं। इसलिए, स्वास्थ्य सुविधाएं तथा स्वास्थ्य संबंधी जानकारी हासिल करना यहाँ के निवासियों के लिए एक बड़ी चुनौती है। यातायात के सार्वजनिक साधन बहुत कम हैं; स्वास्थ्य सुविधाएं काफी दूर-दूर स्थित हैं और अस्पताल पहुंचने में कई घंटे लग सकते हैं।
ये चुनौतियां अक्सर गर्भवती महिलाओं, बुजुर्ग व्यक्तियों और पुरानी बीमारियों से जूझ रहे परिवारों के लिए बड़ी समस्या उत्पन्न करती हैं। कई बार इलाज में देरी हो जाती है या लोग इलाज करवा ही नहीं पाते। प्रसवपूर्व नियमित जांच जैसी जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं कई बार आस-पास के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध नहीं होती। ऐसे में कई महिलाएं गर्भावस्था के दौरान आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं और देखरेख से वंचित रह जाती हैं।
आरोही एक गैर-लाभकारी (नॉन प्रॉफिट) संगठन है, जो उत्तराखंड के ग्रामीण समुदायों के विकास और उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए काम करता है। टिकाऊ आजीविका, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को बढ़ावा देना हमारा लक्ष्य है। हमारा ध्यान महिलाओं और बच्चों पर खास तौर पर है। सतोली में स्थित हमारी संस्था हर साल लगभग 550 गाँवों के दो लाख से अधिक लोगों की जिंदगियों में बदलाव ला रही है। एक समग्र नजरिए के साथ आरोही ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाने और स्वास्थ्य सुविधाओं, शिक्षा एवं आजीविका में सुधार लाने का काम कर रही है। साथ ही यह सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों पर भी ध्यान दे रही है।

हर कैम्प में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों एक टीम मौजूद होती है। इसमें एक फिजीशियन, स्त्रीरोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट, नर्स, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट और सहायक कर्मचारी शामिल होते हैं। हर महीने कुछ विशेषज्ञ डॉक्टर भी कुछ दिनों के लिए इस यूनिट से जुड़ते हैं।
इस क्षेत्र की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को समझते हुए आरोही संगठन ने सन् 2014 में एक मोबाइल मेडिकल यूनिट (MMU) की शुरुआत की – ताकि आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों के घरों तक पहुँचाया जा सके। यह एक विशेष रूप से तैयार की गई बस है, जिसमें जाँच और स्कैनिंग जैसी सुविधाएँ मौजूद हैं। मौजूदा समय में यह मोबाइल यूनिट नैनीताल, अल्मोड़ा और चंपावत जिलों में 500 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र को कवर करती है। यह इस दायरे में मौजूद 130 गांवों के 70 हजार से अधिक लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करती है। मोबाइल मेडिकल यूनिट हर महीने तय कार्यक्रम के अनुसार काम करती है। हर महीने की 1 से 10 तारीख के बीच अलग-अलग जगहों पर कैम्प लगाए जाते हैं। इन कैंपों की जानकारी पहले से ही ब्लॉक और जिला स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ साझा की जाती है, ताकि सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के साथ बेहतर तालमेल बना रहे। आसपास के 15 से 25 गाँवों के लोग कैम्प में आते हैं और इन सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। यह यूनिट हर साल लगभग 90 कैम्प लगाती है और अब तक यह 1100 से अधिक कैम्प पूरे कर चुकी है।
माताओं के लिए आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं के अलावा इस मेडिकल मोबाइल यूनिट में पैथोलॉजी लैब, दवाखाना तथा ईसीजी की सुविधा भी उपलब्ध है।
हर कैम्प में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों एक टीम मौजूद होती है। इसमें एक फिजीशियन, स्त्रीरोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट, नर्स, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट और सहायक कर्मचारी शामिल होते हैं। हर महीने कुछ विशेषज्ञ डॉक्टर भी कुछ दिनों के लिए इस यूनिट से जुड़ते हैं। ऐसा स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने और दूर-दराज के पहाड़ी इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए किया जाता है। इस शिविर के आयोजन में आशा कार्यकर्ता और ग्राम प्रधान की अहम भूमिका होती है। वे मरीजों को जुटाने, कैम्प साइट की व्यवस्था करने और MMU टीम को नियमित, सुचारू और सफल ढंग से कैम्प चलाने में काफी मदद करते हैं।
मोबाइल मेडिकल यूनिट की सबसे ख़ास बात यह है कि एक ही चलते-फिरते क्लीनिक में पर कई तरह की स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हैं। यह देश की उन गिनी-चुनी मोबाइल इकाइयों में से एक है, जिसमें अल्ट्रासाउंड की सुविधा भी उपलब्ध है – चलते फिरते क्लिनिक के लिए यह बहुत बड़ी बात है क्योंकि इसके लिए कुछ खास कानूनी और तकनीकी पहलुओं का भी ध्यान रखना होता है । इन गाँवों की गर्भवती महिलाओं के लिए आरोही की यह मोबाइल यूनिट ही अक्सर अल्ट्रासाउंड जाँच और पूरी प्रसव-पूर्व देखभाल का एकमात्र भरोसेमंद और किफ़ायती साधन है। MMU के जरिए हर साल लगभग 2,000 अल्ट्रासाउंड किए जाते हैं। जिन क्षेत्रों में MMU के जरिए स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच रही हैं, वहाँ पिछले तीन वर्षों में मातृ मृत्यु के मामले खतम हो चुके है।

MMU का कामकाज आरोही की स्वास्थ्य संबंधी सामुदायिक गतिविधियों से भी जुड़ा हुआ है। इनमें महिला स्वास्थ्य संसाधन केंद्र, ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यकर्ता और सामुदायिक नर्सें मिलकर काम करते हैं।
माताओं के लिए आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं के अलावा इस मेडिकल मोबाइल यूनिट में पैथोलॉजी लैब, दवाखाना तथा ईसीजी की सुविधा भी उपलब्ध है। इससे मरीज की बुनियादी जांच, रोग की पहचान और उसका इलाज एक ही बार में संभव हो जाता है। जिससे कई जगहों पर भटकने और बार-बार यात्रा करने की जरूरत नहीं पड़ती है।
समय पर ऑपरेशन न हो पाने से उत्पन्न सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या पिछले एक दशक में वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बन गई हैं। इसके मद्देनजर, MMU कैम्प के दौरान ऐसे मरीजों की भी जाँच की जाती है जिन्हें सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है। ज़रूरत पड़ने पर उन्हें आगे इलाज के लिए आरोही आरोग्य केंद्र भेजा जाता है। इसके साथ ही, MMU उच्च रक्तचाप और मधुमेह के रोगियों के लिए आवश्यक दवाएं भी नियमित रूप से उपलब्ध कराता है। विशेष रूप से, बूढ़े लोगों को इससे काफी लाभ होता है।
MMU का कामकाज आरोही की स्वास्थ्य संबंधी सामुदायिक गतिविधियों से भी जुड़ा हुआ है। इनमें महिला स्वास्थ्य संसाधन केंद्र, ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यकर्ता और सामुदायिक नर्सें मिलकर काम करते हैं। सार्वजनिक फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के साथ काम करते हुए ये टीमें गर्भवती महिलाओं, बच्चों और अन्य कमजोर व्यक्तियों की पहचान करती हैं और उन्हें सेवाओं तक पहुँचने में मदद करती हैं। वे घर-घर जाकर स्वास्थ्य शिक्षा, परामर्श और इलाज के बाद की निगरानी भी करती हैं। MMU में उपलब्ध अल्ट्रासाउंड जैसी सेवाओं के कारण जच्चा और बच्चे को होने वाली स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों की तुरंत पहचान करना संभव हो पाया है। समुदाय आधारित निरन्तर देखभाल के कारण समय पर रेफरल और बेहतर निगरानी संभव हो पाई है।
पहाड़ों में स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाना अपने-आप में एक बड़ी चुनौती है। कई बार भूस्खलन, सड़कों के टूटने, भारी बर्फबारी या बादल फटने जैसी स्थितियों के कारण मोबाइल मेडिकल यूनिट कुछ गाँवों तक नहीं पहुँच पाती। ऐसे समय में छोटी गाड़ियों के माध्यम से आउटरीच OPD कैंप लगाए जाते हैं, जिनमें बुनियादी जाँच और जरूरी दवाइयों की व्यवस्था रहती है, ताकि लोगों की तत्कालिक स्वास्थ्य जरूरतें पूरी हो सकें।

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स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों के घरों के पास पहुँचाकर मोबाइल मेडिकल यूनिट ने इलाज के रास्ते में मौजूद कई बाधाएँ कम कर दी हैं। इससे परिवारों का खर्च भी घटा है और ग्रामीण कुमाऊँ के सबसे दूर-दराज के इलाकों में मातृ स्वास्थ्य और अन्य जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच मजबूत हुई है। पहाड़ों में रहने वाले समुदायों के लिए यह मोबाइल मेडिकल यूनिट सचमुच एक लाइफ-लाइन बन गई है – जो बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ उनके दरवाज़े तक लेकर आती है और यह सुनिश्चित करती है कि भौगोलिक स्थितियों की वजह से अब कोई इलाज से वंचित नहीं रहेगा।
