प्रतिवर्ष जुलाई और अगस्त माह में, जब सार्वजनिक स्वास्थ्य विषय के स्नातकोत्तर छात्रों का एक बैच जाता है और दूसरा आता है, इस दौरान मैं उस बैच से एक साल और बड़ा हो जाता हूँ, जिन्हें मैं पढ़ाता हूँ। लेकिन, इस साल बात कुछ अलग थी क्योंकि यह मेरे जीवन की स्वर्ण जयंती (50वां साल) है और स्वास्थ्य प्रबंधन के मास्टर प्रोग्राम से जुड़ने की रजत जयंती (25वां) है।
जब मैं सार्वजनिक स्वास्थ्य में करियर बनाने के लिए इच्छुक छात्रों को बैचेन और उत्साहित देखता हूँ, तो मैं पाता हूँ कि वे आकांक्षाओं से ज़्यादा अपने भविष्य की असुरक्षा (insecurities) के बारे में अधिक चिंतित रहते हैं। तब मेरा मन करता है कि मैं अपने उस युवा, बेचैन, कम आत्मविश्वास वाले और थोड़े अहंकारी रूप (जब मैं 20-25 साल का था) के साथ बैठूँ और उसे बताऊँ कि ये दो साल दरअसल किसलिए हैं, विषयों और पाठ्यक्रम से परे इनकी क्या उपयोगिता है। ये वे बातें हैं, जिनको काश मैंने उस समय थोड़ा ठहर कर विनम्रता से सुना और समझा होता।
उन दो सालों का अनुभव
- सीखने के प्रति सचेत रहें और नंबर लाने के लिए ज्यादा गंभीर न बनें:
अपने इस दौर से प्यार करें और सीखने की प्रक्रिया का आनंद उठाएं। आप खुश रहते हुए भी फोकस्ड रह सकते हैं। आप नंबर लाने के बजाय सीखने को चुनें, हालांकि दोनों आपस में कोई विरोधी प्रक्रिया नहीं है।
एक स्नातकोत्तर छात्र के रूप में, आपके ऊपर ये दबाव होगा कि आप दूसरों की तरह ‘समय बर्बाद’ न करें तथा जल्द से जल्द अपना रास्ता और मंज़िल तय करें। ऐसे समय में आप केवल अपनी पढ़ाई और करियर से जुड़ी चीजों पर ही अपना ध्यान केन्द्रित रखना चाहेंगे। आप अपने समय को भी इसी आधार पर मापते हैं कि उससे आपके अंकों पर क्या असर पड़ेगा। मेरी सलाह है कि आप ऐसा करने से बचे। अंक किसी प्रोग्राम में एडमिशन के लिए ज़रुर मायने रखता है, लेकिन एक बार जब आप किसी प्रोग्राम में प्रवेश पा लेते हैं, तो उसके बाद अंक उतना मायने नहीं रखता है।
भारत में विकसित नए सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए अन्यायपूर्ण गैर-बराबरी के बारे में एक गहरी समझ विकसित करने की जरूरत है। ताकि, चंद ताकतवर लोगों के हित इकट्ठे लिए गए आंकड़ों और डिज़ाइनों पर साहसपूर्ण ढ़ंग से सवाल उठा सकें, और कमज़ोर लोगों के पक्ष में न्यायपूर्ण समाधान सुनिश्चित करने की वकालत की जा सके। इसे अलग तरीके से सोच-समझकर, खोजबीन कर और नए तरीकों से काम करके ज़्यादा प्रभावी ढंग से यहीं सीखा जा सकता है। हमें नई जगह, नए माहौल, नए लोगों और सीखने एवं जीने के नए तरीकों का आनंद लेना सीखना चाहिए। इसलिए, यह जरूरी है कि हम इस दौर से प्यार करें और सीखने की प्रक्रिया का आनंद लें। ऐसा करके आप खुश रह सकते हैं और फ़ोकस्ड रह सकते हैं। आप नंबर लाने के बजाय सीखने पर अधिक जोर दे सकते हैं, हालांकि दोनों आपस में कोई विरोधी प्रक्रिया नहीं है।
पाठ्यपुस्तकों और इंटरनेट कभी भी जमीनी हक़ीक़त से पैदा समझ का मुक़ाबला नहीं कर सकते, क्योंकि यहीं सूचनाएँ आपमें अंतर्दृष्टि पैदा करती हैं।
- दी गई जिम्मेदारियों से आगे बढ़कर अपने अनुभवों पर ध्यान दें:
स्नातकोत्तर अध्ययन (PG) केवल स्नातक अध्ययन (UG) का विस्तार नहीं है। अगर स्नातक स्तर ने आपको चलना सिखाया है, तो स्नातकोत्तर स्तर आपको उड़ान भरना सिखाएगी। आपको सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में पाठ्यक्रम के कार्यों और नौकरी-केंद्रित गतिविधियों से आगे बढ़कर सोचना होगा। आप कक्षा में जो कुछ भी सीखते हैं, उसे वास्तविक जीवन में लागू करके अपने सोचने का दायरा बढ़ाना होगा। आपकी कोशिश होनी चाहिए कि आप रुचिकर, रचनात्मक और असल दुनिया से जुड़ी चीजों के प्रति अपने अंदर एक जिज्ञासा पैदा कर सकें, ताकि आप उन चीजों के बारे में भी जान सकें जिनसे आप अब तक अनजान रहे हैं। जानकारी को गहरी समझ में बदलने के लिए पाठ्यपुस्तकों और इंटरनेट का ज्ञान काफ़ी नहीं है, इसके लिए ज़मीनी हकीक़त को समझना बेहद ज़रूरी है। ताकि, आप कक्षा के अंदर और उसके बाहर असल दुनिया, असल माहौल और असल लोगों से जुड़ सकें।
लोगों से और सीखने की प्रक्रिया से जुड़ना।
- यहाँ सबके लिए पर्याप्त संसाधन है, इसलिए दूसरों को भी आगे बढ़ने में मदद करें:
दूसरों के द्वारा पसंद किए जाने के अल्पकालीन के दबाव से मुक्त होकर, साथ मिलकर आगे बढ़ने की सुदीर्घ लाभकारी योजना को चुनें।
दूसरों से जल्दी बेहतर नौकरी पाने की होड़ में लगे रहना आपको केवल चिंतित, आत्मकेंद्रित और असुरक्षित बनाएगा। लेकिन हमारा ये क्षेत्र व्यक्तिगत प्रतिभा की प्रतिस्पर्धा पर नहीं टिका है, बल्कि यह एक-दूसरे की पूरक क्षमताओं के सहयोग पर चलता है।
हमें अपने आस-पास के लोगों पर भी उतना ही निवेश करना सीखना चाहिए, जितना हम अपने आप के ऊपर करते हैं। हमें अपने सहपाठियों को अपने समुदाय का हिस्सा मानकर चलना चाहिए। आपको उन लोगों से भी दोस्ती करनी चाहिए जो आपके जैसे नहीं हैं। कभी-कभी लोगों के प्रति संवेदनशील होने का मतलब उनके साथ ईमानदार होना भी होता है, न कि केवल उनके सामने अच्छा बनना। साथ मिलकर सीखने का मतलब सम्मानजनक ढ़ंग से असहमति जताना भी होता है, न कि केवल शिष्टाचारवश सहमति जताना। थोड़े समय के लिए दूसरों के द्वारा पसंद किए जाने के दबाव से मुक्त होकर साथ मिलकर आगे बढ़ने की दीर्घकालिक लाभकारी योजना को चुनें। बहस, संवाद और साझा विचारों की आलोचनात्मक समीक्षा के लिए एक सकारात्मक माहौल बनाएं। क्योंकि, दुनिया की ज़्यादातर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्याओं को समझने के लिए हमें एक-दूसरे के साथ सहानुभूतिपूर्ण संबंध रखने की ज़रूरत होती है।
- शिक्षक द्वारा बताए गए को रटने की आदत छोड़ें और जिज्ञासापूर्ण ढ़ंग से सवाल पूछें:
चुपचाप पढ़ने और नोट्स लेने की पुरानी आदतें आपको सवाल पूछने में झिझक महसूस करा सकती हैं। लेकिन, याद करें कि एक जिज्ञासु बच्चे के रूप में आप पहले हर किसी से हर चीज़ के बारे में कई सवाल पूछते थे। सार्वजनिक स्वास्थ्य के काम में आगे चलकर आपको कंटेंट, संदर्भ और अपने आस-पास के लोगों के बारे में सार्थक सवाल पूछने की जिज्ञासा की जरूरत होगी। जानकारी आसानी मिल जाने पर आप जल्दी ऊब सकते है, इसके बजाय आप यह पता लगाने की कोशिश करें कि अमुक जानकारी क्यों महत्त्वपूर्ण हैं, यह क्या है और किसके लिए है। प्रोफेसरों और साथियों से केवल अवधारणाओं, क्षमताओं और नियमों का पालन करने के लिए नहीं, बल्कि व्यापक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए जुड़े। स्पष्ट रूप से सोचने और सक्रिय रूप से सुनने के लिए प्रोडक्टिव साइलेंस (काम के दौरान ख़ामोशी) का अभ्यास करें और फिर उसके बाद अपनी उलझन और प्रशंसा को उतना ही खुलकर साझा करें, जितना खुलकर आप अपने जवाब साझा करते हैं।
अपनी अहमियत समझने के संबंध में
जिस दौरान आप सार्वजनिक स्वास्थ्य विषय में स्वास्थ्य के बारे में सीख रहे हैं, आपको उतनी ही शिद्दत से अपने स्वास्थ्य का भी ख्याल रखना चाहिए। इसके लिए ज़रूरी है कि आप अच्छा खाएं, अच्छी नींद लें और शारीरिक रूप से फिट रहें।
- आप अपना बेहतर संस्करण बनने की दिशा में काम करें – ताकतवर संस्करण बनने की दिशा में नहीं:
जिसमें आप पहले से अच्छे हैं, उसी पर और ज़ोर देना उत्पादक (प्रोडक्टिव) लग सकता है, लेकिन यह एक भ्रम है। क्योंकि यह आपको केवल वही बनाता है जो आप पहले से हैं। यह आपको पहले से बेहतर नहीं बनाता है। इसलिए, यह जरुरी है कि आप उन क्षेत्रों पर काम करें, जिनके बारे में आपकी जानकारी कम है, न कि जिसके बारे में आप पहले से काफी कुछ जानते हैं। आप अपने स्नातक विषयों से आगे बढ़कर नई चीजों को सीखने की कोशिश करें। उन वर्षों की तुलना में जब मैं अपनी विशेषज्ञता का प्रदर्शन करने में व्यस्त था, मैंने उन सालों में ज़्यादा सीखा, जब मैंने इस बात पर सोचना शुरू किया कि मैं क्या नहीं जानता हूँ। किताबों या स्क्रीन से मिली जानकारी की अपेक्षा, वास्तविक जीवन एवं खोज से मिली जानकारी पर अधिक ध्यान दें। ‘सार्वजनिक स्वास्थ्य’ में हम ‘सार्वजनिक’ यानि लोगों पर ज़्यादा ध्यान देते हैं। इसलिए, उन प्रणालियों और विज्ञान के बारे में सिर्फ पढ़ने के बजाय उन लोगों और समाज से ज़्यादा-से-ज़्यादा सीखने की ज़रूरत है, जिनके बीच आप असल में काम करते हुए अपना समय बिताते हैं। - अपने – वर्तमान – स्वयं का ख्याल रखें:
आपके भविष्य के रूप में खुद को देखते हुए, मैं आपसे कहना चाहूँगा कि मेरे जीवन में चीजें किस दिशा में आगे बढेंगी, इसको लेकर मैंने अपना रास्ता चुन लिया है। मैंने अपना समय रहते, अपना रास्ता खोजा। आपको मेरे बारे में चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। जिस दौरान आप सार्वजनिक स्वास्थ्य विषय में स्वास्थ्य के बारे में सीख रहे हैं, आपको उतनी ही शिद्दत से अपने स्वास्थ्य का भी ख्याल रखना चाहिए। इसके लिए ज़रूरी है कि आप अच्छा खाएं, अच्छी नींद लें और शारीरिक रूप से फिट रहें। ख्याल रखने की इस आदत को केवल खुद तक ही सीमित न रखें, बल्कि अपने सम्बन्धों का भी ख्याल रखें: अपने परिवार और दोस्तों से जुड़े रहें। अपनी बात खुलकर करें और अपने दिल की बात पूरी तरह से साझा करें। मेरी अवस्था में आने से पहले, आप जो हैं उसका पूरा आनंद लें।
जब मैं इस साल के झिझकते और सतर्क छात्रों का स्वागत कर रहा हूँ, तो मैं सोचता हूँ कि विश्वविद्यालय में बिताए इन दो सालों से उन्हें क्या मिलेगा। क्या उनका ध्यान अपना काम पूरा करने के बजाय अनुभव प्राप्त करने पर, जानकारी बटोरने के बजाय गहरी समझ विकसित करने पर, निर्देशों का पालन करने के बजाय जिज्ञासापूर्ण सवाल पूछने पर, बोलने के बजाय सुनने पर, दिखावटी अच्छे व्यवहार के बजाय ईमानदारी पर और अधिक नंबर लाने के पीछे भागने के बजाय सीखने पर होगा। क्योंकि, ये वे बातें हैं जो न केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य के भविष्य को प्रभावित करेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को सिखाने, उनकी परवरिश करने और आने वाली पीढ़ियों का नेतृत्व करने की उनकी क्षमता को भी प्रभावित करेंगी। मैं यह पत्र उनमें से किसी छात्र को नहीं दे सकता। वे अभी मेरी इस बात पर विश्वास नहीं करेंगे, और ऐसा होना भी चाहिए। फिर भी, जब मैं उन्हें देखता हूँ, तो आशा करता हूँ कि उनके दो साल पूरे होने से पहले एक सहज तरीके से इस पत्र की भावना उन तक संप्रेषित हो जाए।
