गाँव स्वास्थ्य पोषण और स्वच्छता दिवस: स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम छोर तक पहुँचाने की योजना

गौरतलब है कि एक अच्छी तरह से चलने वाला वीएचएसएनडी (VHSND), शिक्षा और रोकथाम के ज़रिए ग्रामीण स्वास्थ्य को कैसे बदल सकता है।

गाँव स्वास्थ्य पोषण और स्वच्छता दिवस: स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम छोर तक पहुँचाने की योजना

संगीता मिंज दो नदियों को पार करके छत्तीसगढ़ के धरमजयगढ़ ब्लॉक के एक आंगनवाड़ी केंद्र पहुँची थीं। उनके एक हाथ में टीके की शीशियों वाला एक आइस बॉक्स और दूसरे हाथ के बैग में चिकित्सा उपकरण, सप्‍लीमेंट्स और दवाइयां थीं। उन्‍होंने एक दिन पहले ही अपना बैग तैयार कर लिया था।  

आज दिन का उनका काम तय था। उन्‍हें पाँच बच्चों का टीकाकरण करना था, तीन गर्भवती महिलाओं की प्रसव से पहले होने वाली नियमित जांच करनी थी। इसके अलावा उन्हें एक गंभीर रूप से कुपोषित बच्चे के माता-पिता की काउंसिलिंग भी करनी थी। तीन सामान्‍य मरीजों को देखना था और विटामिन ए की खुराक देनी थी। 

वे पास के आयुष्मान आरोग्य मंदिर की सहायक नर्स मिडवाइफ (एएनएम) हैं। इस नाते वे जानती हैं कि पूरे दिन की अच्छी योजना बनाना बहुत जरुरी है। तभी वे ब्लॉक मुख्यालय से बहुत दूर रहने वाले ग्रामीणों को सेवाएँ दे पाएंगी। बारिश और दूरी की वजह से इस इलाके में स्वास्थ्य सेवाएँ मुश्किल से ही लोगों तक पहुँच पाती हैं। उस दिन उन्‍हें जिन भी लोगों से मिलना है, उनके लिए आँगनवाड़ी केंद्र ही स्वास्थ्य सुविधा के सबसे नज़दीकी ठिकाने हैं। 

आशा कर्मियों को छत्तीसगढ़ में मितानिन कहा जाता है। मितानिन और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पूरी जिम्मेदारी से अपने कर्तव्यों का पालन करती हैं। वे हर महीने एक ख़ास दिन ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता और पोषण दिवस (वीएचएसएनडी) आयोजित करती हैं। 

नीति  

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने 2007 में तय किया था कि ग्राम स्वास्थ्य और पोषण दिवस (वीएचएनडी) हर महीने के एक दिन एक निश्चित जगह पर किया जायेगा। 2019 में इस मिशन को और विस्तारित किया गया, इसमें स्वच्छता को भी शामिल कर लिया गया। 

इसकी रूपरेखा का केंद्रीय बिंदु इसकी सुलभता है। जिसका अर्थ है कि दूर-दराज के इलाकों में भी हर व्यक्ति आसानी से स्वास्थ्य और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएँ प्राप्त कर सके। हम जानते ही हैं कि सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य प्रणाली के तहत दी जाने वाली प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह मुफ़्त दी जाती हैं। उसी तरह ये सेवाएँ भी मुफ़्त में दी जाती हैं। 

यह कोई आसान काम नहीं है। इसके तहत एक दिन में इतने सारे काम पूरे करने होते हैं कि इसके लिए बड़ी सावधानी और सूझबूझ से योजना बनाने की जरूरत होती है। एएनएम को उन लोगों की सूची बनानी होती है, जिनका टीकाकरण होना है। उतने लोगों की वैक्‍सीन के लिए निकटतम वैक्सीन स्‍टोरेज सेंटर में पहले से अर्जी देनी होती है। वीएचएसएनडी के दिन ही, उन्‍हें वैक्सीन स्‍टोरेज सेंटर से वे वैक्सीन शीशियाँ लेनी होती हैं। उन्‍हें चिकित्सा उपकरण और जरूरी दवाइयों वाला अपना बैग भी लेना होता है। इन सभी सामानों के साथ, उन्‍हें वीएचएसएनडी की जगह पर पहुँचना होता है। 

वीएचएसएनडी केंद्र पर पहुँचने से पहले उन्‍हें आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को अपने आने की सूचना दे देनी होती है। ताकि, वे वहाँ पर जरूरी इंतजाम करके रखें। जिन लोगों को आने की जरूरत है, उन्हें समय से सूचना दे दी जाए। यह काम उनके काम के इलाके में आने वाले सभी चार से आठ वीएचएसएनडी केन्‍द्रों पर हर महीने करना होता है।

यह प्रणाली देश के अधिकांश हिस्सों में काम कर रही है। हालाँकि, देश के विभिन्न हिस्सों में इसके काम की उत्कृष्टता का स्तर अलग-अलग है। इसका श्रेय सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य प्रणाली में मौजूद अच्छे लोगों को जाता है। वे लचीलेपन और दृढ़ता के साथ इस जटिल प्रणाली को चलाने की चुनौतियों का सामना करने के साथ-साथ दूर-दराज़ के इलाकों में आने वाली कठिनाइयों को भी हल करने की कोशिश करते हैं। 

दी जाने वाली सेवाओं के मुख्य पहलू  

वीएचएसएनडी के दौरान कुल 17 तरह की सेवाएँ दी जाती हैं। इसमें स्वास्थ्य, पोषण, प्राथमिक शिक्षा और स्वच्छता के बिंदु शामिल हैं।  

स्वास्थ्य संबंधी दिशा-निर्देशों के अनुसार, वीएचएसएनडी के दौरान कुल 9 तरह की सेवाएँ दी जाती हैं। इनमें से 7 के बारे में चिकित्सीय सेवाएँ और सलाह दी जाती है : 

वीएचएसएनडी केंद्र पर पहुँचने से पहले उन्‍हें आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को अपने आने की सूचना दे देनी होती है। ताकि, वे वहाँ पर जरूरी इंतजाम करके रखें। जिन लोगों को आने की जरूरत है, उन्हें समय से सूचना दे दी जाए। यह काम उनके काम के इलाके में आने वाले सभी चार से आठ वीएचएसएनडी केन्‍द्रों पर हर महीने करना होता है। 

  • टीकाकरण  
  • प्रसवपूर्व देखभाल 
  • प्रसव के बाद देखभाल 
  • परिवार नियोजन 
  • किशोर स्वास्थ्य 
  • संक्रमण रोग (क्षय रोग) 
  • प्रजनन तंत्र संक्रमण (Reproductive Tract Infection) 

बाकी दो मुद्दों पर समूह में सलाह सेवाएँ दी जाती हैं : 

  • असंक्रामक रोग  
  • घरेलू हिंसा और प्रसवपूर्व बच्चे के लिंग की पहचान करवाने जैसे जेंडर संबंधी मुद्दे  

पोषण संबंधी कुल 6 सेवाएं उपलब्ध हैं। इनके बारे में सेवाएँ प्रदान करना और पोषण संबंधी जागरूकता फैलाना भी इस दिन का काम होता है। ये सेवाएँ इस तरह हैं: 

  • बच्चे के शारीरिक विकास की निगरानी रखना  
  • एनीमिया की रोकथाम और प्रबंधन 
  • विटामिन ए की कमी पूरी करना  
  • पोषण को पूरा करना 

निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखते हुए पोषण संबंधी जागरूकता अभियान लेना : 

  • पोषण में वृद्धि के बारे में जागरूकता फैलाना 
  • नमक की फोर्टिफिकेशन (नमक में पोषक तत्वों की वृद्धि) 

यदि ये चिकित्सीय सेवाएं उपलब्ध हों, तो ये सेवाएँ एएनएम और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) द्वारा प्रदान की जाती हैं। आशा कर्मी जरूरतमंद लोगों को सूचना देने और उन्हें जुटाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वे विशेष रूप से प्रजनन, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य जैसे मामलों पर सलाह भी देती हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बढ़ती उम्र के बच्चों की निगरानी करने, पोषण संबंधी सलाह देने और सप्लिमेंट आहार बांटने के साथ-साथ समुदाय के लोगों को जुटाने में आशा कर्मियों का सहयोग करती हैं। 

वे विशेष रूप से प्रजनन, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य जैसे मामलों पर सलाह भी देती हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बढ़ती उम्र के बच्चों की निगरानी करने, पोषण संबंधी सलाह देने और सप्लिमेंट आहार बांटने के साथ-साथ समुदाय के लोगों को जुटाने में आशा कर्मियों का सहयोग करती हैं। 

एक सफल वीएचएसएनडी 

The Health Worker Infographic-image

आशा बारा धरमजयगढ़ ब्लॉक में एएनएम के रूप में काम करती हैं। उन्होंने देखा कि समय के साथ दी जाने वाली सेवाएँ केवल टीकाकरण और प्रसवपूर्व देखभाल तक सीमित होकर रह गई थीं। वे इसे सुधारना चाहती थीं। उन्होंने व्यवस्थित रूप से एक समय में एक जगह पर बदलाव लाना शुरू किया। पहला वीएचएसएनडी केन्‍द्र चुने जाने के बाद, मितानिन और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को विश्वास में लेना जरूरी था। 

आंगनवाड़ी में सेवाएँ देने के लिए अलग-अलग जगहें एक दिन पहले ही तय कर ली गई थीं। बच्चों का विकास मापने और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए स्क्रीनिंग क्षेत्र बनाए गए। पेट की जाँच के लिए परदा लगाकर एक जगह तैयार कर ली गई। स्वास्थ्य संबंधी सलाह देने के लिए अलग जगहें तय कर ली गईं। पीने के पानी का इंतजाम भी किया गया था। समुदाय के लोगों को पहले से इसकी जानकारी दे दी गई थी।  

अगले दिन आंगनबाड़ी में खूब चहल-पहल थी। उस दिन की कुछ गतिविधियाँ इस प्रकार थीं : 

किशोरियाँ एक कोने में बैठी थीं और उन्हें आयरन-फॉलिक एसिड की ज़रूरत के बारे में जानकारी दी जा रही थी।  

बच्चों के शारीरिक विकास की जांच करने वाली जगह के पास ही एक पोषण कोना बनाया गया था। यहाँ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता माताओं को समझा रही थीं कि उनके आस-पास की जगहों पर उपजाया गया भोजन उनके बच्चों के स्वास्थ्य के लिए क्यों जरुरी है।

एएनएम गर्भवती महिलाओं का वज़न ले रही थीं और उनके स्वास्थ्य संबंधी जाँच के आँकड़े (तपमान, रक्तचाप, प्लस रेट आदि) दर्ज कर रही थीं। महिलाओं को पर्याप्त सप्लीमेंट दिए गए। इसके साथ ही अच्छे से आराम करने, अच्छा खाना खाने और समय पर सप्लीमेंट लेने की सलाह दी गई। 

मितानिन गर्भावस्था के अंतिम चरण वाली महिलाओं को सलाह दे रही थीं कि प्रसव की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित कर लें। 

अच्छी पहल, चीजों की बारीकियों पर ध्यान देने और एक टीम के रूप में मिलकर काम करके उन्‍होंने वीएचएसएनडी को एक जीवंत कार्यक्रम में बदल दिया। यहाँ स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं पर चर्चा की जा सकती थी और घर के पास ही देखभाल की सेवाएँ उपलब्ध थीं।

आशा बारा और संगीता मिंज की तरह ही, देश भर के लगभग 1.6 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की एएनएम प्रति सप्ताह एक या दो वीएचएसएनडी के जरिये विभिन्न समुदायों को स्वास्थ्य सेवाएँ घर-घर पहुँचा रही हैं। 

आशा बारा और संगीता मिंज की तरह ही, देश भर के लगभग 1.6 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की एएनएम प्रति सप्ताह एक या दो वीएचएसएनडी के जरिये विभिन्न समुदायों को स्वास्थ्य सेवाएँ घर-घर पहुँचा रही हैं।