बेटे की चाह में बार-बार गर्भधारण और देखभाल से वंचित एक महिला की कहानी
बोलने में असमर्थ एक महिला जब पाँचवीं बार गर्भवती होने पर प्रसवपूर्व जाँच के लिए स्वास्थ्य केंद्र पहुँची, तो उसकी देखभाल के दौरान ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की कई कमियाँ सामने आईं। ये कमियाँ स्वास्थ्य सेवाओं के ढाँचे और कामकाज तक ही सीमित नहीं थीं, बल्कि इनके पीछे गहरी सामाजिक समस्याएँ भी थीं। यह घटना समाज में बेटे को तरजीह देने की पुरानी सोच और उसके चलते महिलाओं की सेहत पर पड़ने वाले बुरे असर को भी उजागर करती है।
